देहरादून। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के देहरादून परिसर (कन्या गुरुकुल) में सोमवार को हिंदी दिवस पर ‘हिंदी का डिजिटल भविष्य’ विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। हिंदी विभाग की ओर से आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता ने कहा कि डिजिटल युग में हिंदी में अवसर बढ़ रहे हैं। हिंदी आज रोजगार की भाषा बन चुकी है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रचना चौहान द्वारा किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. निशा यादव ने हिंदी के तकनीकी पक्ष पर संक्षेप में जानकारी देते हुए, अनुवादिनी, भाषिणी एवं आदिवाणी जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित भाषा अनुवाद टूल्स के बारे में भी छात्राओं को जानकारी प्रदान की।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर एवं दैनिक समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व स्थानीय संपादक (कुमाऊं) ठाकुर सिंह नेगी ने भाषा के रूप में डिजिटल युग में हिंदी की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तकनीकी के इस दौर में आज हिंदी भारत में ही नहीं वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। हिंदी की भाषिक सामर्थ्य को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा की ताकत सिर्फ उसके बोलने वालों की संख्या पर ही निर्भर नहीं करती अपितु उसकी असली ताकत उसके रोजगार पक्ष से जुड़ी होती है और हिंदी रोजगार की भाषा है।
उन्होंने बताया कि हिंदी आज तकनीक की भाषा के रूप में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोजगार के अनेक पटल जैसे- वीडियो संवादक, सोशल मीडिया प्रबंधन, कंटेंट लेखन, डिजाइन और ग्राफिक्स, ऑनलाइन मार्केटिंग,सोशल मीडिया अनुवादक और डिजिटल प्रशासनिक कार्य आदि हमारे सामने खोलती है। मुख्य वक्ता के रूप में उन्होंने छात्राओं को यूनिकोड के महत्व के साथ ही यह भी बताया कि यूनिकोड ने किस तरह से हिंदी भाषा के डिजिटल भविष्य को एक नई दिशा देने का कार्य किया। इसी का परिणाम है कि आज किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है।
मुख्य वक्ता नेगी ने यह भी बताया कि आज की युवा पीढ़ी हिंदी भाषा के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रस्तुतिकरण किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे- यू-ट्यूब, इंस्टग्राम और फेसबुक आदि पर बहुत ही कम संसाधनों में करने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि हिंदी आज तकनीकी युग में भी तीसरे नम्बर पर सर्वाधिक बोले जाने वाली भाषा है यही कारण है कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी हिंदी में कंटेंट तैयार कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने हिंदी के शुद्ध उच्चारण और लेखन पर भी छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी। कार्यक्रम में शोधार्थी एवं विद्यार्थियों के साथ ही डॉ. रचना चौहान और डॉ. रेखा राजपूत भी उपस्थित रहे।

