देहरादून। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले जेन जी आंदोलन के बाद तमाम सरकारें युवाओं को आकर्षित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही हैं। चुनावी राज्य उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने प्रदेश के युवाओं के करियर के लिहाज से एक बड़ी योजना शुरू कर दी है। इस योजना के माध्यम से धामी सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उत्तराखंड के युवाओं के लिए एक ऐसा दरवाजा खोला है, जिसके पार अवसर है और इस बार आर्थिक हैसियत उस अवसर तक पहुंचने की राह में दीवार नहीं बनेगी।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के 11 हजार विद्यार्थियों को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ने की घोषणा की है। यूपीएससी और स्टेट पीसीएस से लेकर एसएससी, रेलवे, बैंकिंग, डिफेंस, नेट, गेट, सीएसआईआर-जेआरएफ और कैट-मैट तक की तैयारी इस योजना के दायरे में होगी। ध्यान रहे कि यह महज एक कोचिंग योजना नहीं है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहां बेहतर प्रतियोगी परीक्षा संस्थानों तक पहुंच अक्सर युवाओं की आर्थिक क्षमता और भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है, ऑनलाइन माध्यम से गुणवत्तापूर्ण तैयारी उपलब्ध कराने की पहल अवसरों की समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग साबित हो सकती है।
11 हजार युवाओं के लिए अवसरों का बड़ा प्लेटफॉर्म
योजना के पहले चरण में 11 हजार विद्यार्थियों को अलग-अलग प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। 2 हजार विद्यार्थी यूपीएससी और स्टेट पीसीएस की तैयारी करेंगे, जबकि 5 हजार विद्यार्थियों के लिए एसएससी, रेलवे और बैंकिंग सेवाओं की कोचिंग होगी। 2 हजार युवाओं को डिफेंस सर्विसेज की परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाएगा। इसके अलावा 1 हजार विद्यार्थियों को नेट, गेट, सीएसआईआर और जेआरएफ तथा 1 हजार विद्यार्थियों को कैट और मैट जैसी प्रबंधन प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा। यानी योजना का दायरा सरकारी नौकरी की तैयारी तक सीमित नहीं है। इसमें उच्च शिक्षा, शोध, तकनीकी क्षेत्र, रक्षा सेवाओं और प्रबंधन संस्थानों तक पहुंच बनाने वाले युवाओं को भी शामिल किया गया है।
प्रतिभा होगी आधार, जेब नहीं
योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका चयन तंत्र है। विद्यार्थियों का चयन खुली ऑनलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन करेंगे और स्क्रीनिंग परीक्षा में उनके प्रदर्शन, योग्यता तथा निर्धारित पात्रता के आधार पर संबंधित कोर्स में प्रवेश दिया जाएगा।
मेधावी और टॉपर विद्यार्थियों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था भी रखी गई है। इसका सीधा मतलब है कि जिस विद्यार्थी में क्षमता है, लेकिन परिवार महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकता, उसके सामने अब एक वैकल्पिक रास्ता होगा।
पहाड़ के युवाओं के लिए क्यों खास है यह पहल?
उत्तराखंड में देहरादून, हल्द्वानी जैसे शहरों के बाहर रहने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हमेशा आसान नहीं रही है। कोचिंग की फीस के साथ शहर में रहने, खाने और आने-जाने का खर्च भी जुड़ जाता है। नतीजा यह कि कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षा की दौड़ शुरू करने से पहले ही संसाधनों की कमी से पीछे छूट जाते हैं। ऑनलाइन कोचिंग इस समस्या का पूरी तरह समाधान तो नहीं है, लेकिन भौगोलिक दूरी की बाधा को काफी हद तक कम कर सकती है। अब उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, चंपावत, रुद्रप्रयाग या बागेश्वर का विद्यार्थी भी अपने घर से देश के अनुभवी शिक्षकों की कक्षा से जुड़ सकता है। यही इस योजना की सबसे बड़ी संभावनाओं में से एक है।
सिर्फ ऑनलाइन क्लास नहीं, तैयारी का पूरा सिस्टम
सरकार ने योजना को केवल लाइव क्लास तक सीमित नहीं रखा है। विद्यार्थियों को रिकॉर्डेड लेक्चर, डिजिटल स्टडी मटेरियल, विषयवार प्रश्न बैंक, ऑनलाइन टेस्ट, मॉक टेस्ट और परीक्षा पैटर्न आधारित अभ्यास भी उपलब्ध कराया जाएगा। यानी विद्यार्थी सिर्फ शिक्षक को सुनेंगे नहीं, बल्कि लगातार अपनी तैयारी को परख भी सकेंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं में यही निरंतर अभ्यास और अपनी कमजोरियों की पहचान अक्सर सफलता और असफलता के बीच का अंतर बनती है।
देश के प्रोफेशनल शिक्षकों से मिलेगा मार्गदर्शन
योजना के लिए स्टडी आईक्यू, दिल्ली, महेंद्र प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ और दून ड्रीमर्स, देहरादून जैसे संस्थानों का चयन किया गया है। इन संस्थानों के विशेषज्ञ शिक्षकों के साथ देश के अनुभवी और प्रोफेशनल ट्यूटरों एवं विषय-विशेषज्ञों को भी अभियान से जोड़े जाने की योजना है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षा का पाठ्यक्रम पढ़ लेना और परीक्षा के लिए सही रणनीति बनाना दो अलग-अलग चीजें हैं। सही रणनीति, टाइम मैनेजमेंट, टेस्ट प्रैक्टिस और लगातार मूल्यांकन विद्यार्थियों को परीक्षा की वास्तविक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकते हैं।
धामी का संदेश- बड़े सपने देखो
योजना के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवाओं से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। युवा प्रतिभाशाली और मेहनती हैं, जरूरत उन्हें सही दिशा, संसाधन और समान अवसर देने की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार चाहती है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी विद्यार्थी की प्रतिभा और उसके सपनों के बीच बाधा न बनें। यह संदेश योजना की मूल भावना को भी स्पष्ट करता है- सरकार अवसर उपलब्ध कराएगी, सफलता की लड़ाई युवा अपनी मेहनत से लड़ेंगे।
नौकरी पाने से आगे, नौकरी देने की सोच
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर युवाओं के रोजगार को लेकर सरकार की व्यापक सोच भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाना नहीं है। उत्तराखंड का युवा नौकरी मांगने वाला ही नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला भी बने, इसके लिए स्टार्टअप, स्वरोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश में रिवर्स पलायन का उल्लेख करते हुए कहा कि अनेक युवा गांवों की ओर लौटकर कृषि-बागवानी, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े व्यवसायों के माध्यम से न केवल अपना रोजगार खड़ा कर रहे हैं, बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार पैदा कर रहे हैं।
युवाओं को नीति निर्माण में भागीदार बनाने की तैयारी
सरकार की युवा नीति का एक और महत्वपूर्ण पहलू युवाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी न मानकर नीति निर्माण में भागीदार बनाने की सोच है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के ढाई लाख से अधिक युवा विद्यार्थियों के साथ वैचारिक मंथन कर उनके विचार और सुझाव लिए जा रहे हैं। युवाओं की आकांक्षाओं और रोजगार से जुड़े विषयों पर काम करने के लिए अलग ‘युवा आयोग’ बनाने की बात भी कही गई है। यह संकेत महत्वपूर्ण है। क्योंकि उत्तराखंड के युवाओं का भविष्य केवल सरकारी नौकरी की संख्या से तय नहीं होगा। शिक्षा, उद्यमिता, कौशल, रोजगार, पलायन और स्थानीय अर्थव्यवस्था, इन सभी सवालों का जवाब युवाओं की भागीदारी से ही निकल सकता है।
योजना की असली परीक्षा अब शुरू होगी
सरकार ने योजना के जरिए अवसर उपलब्ध कराने की पहल जरूर की है, लेकिन इसकी सफलता कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब पर निर्भर करेगी। क्या दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के पास पर्याप्त इंटरनेट सुविधा है? क्या चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी? क्या ऑनलाइन कक्षाओं में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और सहभागिता सुनिश्चित होगी? क्या मॉक टेस्ट और मूल्यांकन वास्तव में परीक्षा स्तर के होंगे? सबसे महत्वपूर्ण यह कि क्या इन 11 हजार विद्यार्थियों की सफलता का नियमित ट्रैक रखा जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में इस योजना की वास्तविक तस्वीर सामने लाएंगे। फिर भी शुरुआत के स्तर पर यह पहल उत्तराखंड के उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो प्रतिभा तो रखते हैं, लेकिन संसाधन सीमित हैं। आखिर मंजिल तक पहुंचने के लिए हर युवा को एक जैसा रास्ता नहीं मिलता, लेकिन अवसर बराबर मिलें तो तस्वीर जरूर बदल सकती है। 11 हजार युवाओं के लिए शुरू हुआ यह सफर कितनों को मंजिल तक पहुंचाता है, अब निगाहें इसी पर रहेंगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि चुनावी साल में ही सही लेकिन युवाओं के लिए शुरू की गई यह योजना परवान चढ़ेगी।

