लेखक गांव जो लेखकों और पाठकों का तीर्थ बन जाएगा..

नालंदा पुस्तकालय में किताबों का संसार आपको अलग अलग विषयों के महासागर में लेकर जाता है।

By
Adda Insider
Adda Insider: Your Voice, Your News. From the bustling streets of Dehradun to the remote corners of the Himalayas, Adda Insider serves as Uttarakhand’s trusted news...
4 Min Read
Highlights
  • लेखक गांव: जहां हर पगडंडी एक कहानी, एक नई कविता की ओर ले जाती है।
  • लेखक गांव: एक ऐसा ठिकाना जहां शब्द और कल्पना सांस लेते हैं।

पंकज कुशवाल (लेखक गांव से लौटकर)। सोशल मीडिया पर लंबे समय से थानों स्थित लेखक गांव की तस्वीरें, वीडियो देख रहा था। लेखक गांव, सुनने में ही नवाचार से भरा धरातल पर उतारा गया विचार लगता है। बहुत दिनों से वहां जाकर इस विचार को जानने देखने समझने की योजना बना रहा था, कहते भी हैं कि जिसके पास कोई काम नहीं होता इत्तेफाक से उसके पास कोई काम करने का उचित समय भी नहीं होता। गुरुवार को तय किया गया कि वहां जाऊं लेकिन सोशल मीडिया पर पता चला था कि बुधवार रात वहां एक बहुत बड़ा वैवाहिक समारोह था तो संभव है कि गुरुवार को शामियाने उतारने, बारात के मेहमानों का छोड़ा कचरा संभालने में पूरा इलाका व्यस्त होगा। लिहाजा योजना शुक्रवार के लिए मुल्तवी कर दी गई। शुक्रवार को आखिरकार तमाम खाली टाइम में लफ्फाजी का मोह त्याग, खराब हो चुकी स्कूटी (जो अब लातों की भूत हो चुकी है) को दर्जनभर बार लतियाने के बाद स्टार्ट कर लेखक गांव का रूख किया गया। शहर से बहुत दूर नहीं पर शहर के अलग बेहद शांत और घने जंगल की छांव में आम के विशाल वृक्षों के साथ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक के इस नवाचारी विचार को धरातल पर साकार किए गए ‘लेखक गांव’ आखिरकार अपन पहुंच ही गए।
खाली सपाट जमीन पर पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित हर निर्माण किसी केनवास पर तसल्ली से उकेरे गए खूबसूरत रंगों से भरी अमूल्य कलाकृति लगती है। डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने लेखक गांव की स्थापना जिस उद्देश्य से की, वह गेट के भीतर प्रवेश करने पर स्थापित किए गए बोर्ड से पता चल जाता है। यह दीगर बात है कि जिस देहरादून को कभी शिक्षण संस्थानों, बौद्धिक प्रतिभाओं, पढ़ने-लिखने वालों का शहर कहा जाता था, उस पहचान का नया केंद्र भविष्य में लेखक गांव जरूर बन सकता है।
 नालंदा पुस्तकालय में किताबों का संसार आपको अलग अलग विषयों के महासागर में लेकर जाता है। लेखक गांव का प्रचार नहीं कर रहा हूं, आपको जरूर जाकर देखना चाहिए कि कैसे एक प्रख्यात नेता ने अपने पढ़ने-लिखने की आदत को इतना व्यापक स्वरूप दिया है। हर नेता को अपने संसाधनों, अपनी काबिलियत, अपने स्रोतों का ऐसा ही उपयोग करना चाहिए। यह स्मारक मात्र नहीं है बल्कि समाज के लिए एक संपति भी है।
लेखक गांव जाकर मुझे इस जगह से बेशुमार मोहब्बत हो गई, सिर्फ इसलिए नहीं कि यहां रहने के लिए सभी सुविधाओं से युक्त आवास बने हैं लेकिन जिस अवधारणा के साथ इसकी स्थापना की गई है, नालंदा पुस्तकालय किताबों का जो समुद्र आपके पास लेकर आता है, पहाड़ की संस्कृति को दर्शाती रसोई आपको पहाड़ का जायका परसोती है या फिर प्रकृति और हमारी धार्मिक मान्यताओं के गहरे संबंध को दर्शाती नर्सरी से गुजरते हुए आपको अहसास होता है कि लेखक गांव किसी व्यक्ति की मिल्कियत भर नहीं है यह किसी राज्य, किसी संस्कृति, किसी परंपरा का तीर्थ स्थल है तो आप पाते हैं कि लेखक गांव जैसे नवाचारी प्रयोग कितने जरूरी है।
लेखक गांव वाकई बहुत खूबसूरत जगह है, नर्सरियों में रोपे गए पौधे जब पेड़ों का रूप लेंगे तो उतने ही समय में यह लेखक गांव भी दुनिया भर के लेखकों और पाठकों के लिए एक तीर्थ समान साबित होगा। मुझे इंतजार है नक्षत्र वाटिका से लेकर हर नाटिका में रोपे गए पौधों के पेड़ बन जाने का…
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। व्यक्त विचार निजी हैं।)
Share This Article
Follow:
Adda Insider: Your Voice, Your News. From the bustling streets of Dehradun to the remote corners of the Himalayas, Adda Insider serves as Uttarakhand’s trusted news companion. Our daily digital portal keeps you updated on the go, while our weekly print edition offers a curated look at the week’s biggest stories. We aren't just reporting news; we are documenting the spirit of Uttarakhand.
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *