धामी ने बांटे विभाग: धनदा से हेल्थ हटा तकनीकी शिक्षा मिला, सुबोध की बल्ले-बल्ले, नए मंत्रियों को मिले ये विभाग

चुनावी साल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्री सुबोध उनियाल पर जताया भरोसा। डॉ धन सिंह रावत से स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा हटाकर सुबोध उनियाल को सौंपे अहम विभाग।

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देहरादून: धामी मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे पर सबकी नजरें टिकी हुई थी। रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुराने मंत्रियों के विभागों में कुछ फेरबदल के साथ पांचों नए मंत्रियों को विभाग सौंप दिए हैं। जबकि मुख्यमंत्री ने अपने पास सामान्य प्रशासन, गृह, कार्मिक, नियुक्ति एवं प्रशिक्षण, ऊर्जा, आबकारी, खनन और  सूचना एवं जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विभाग रखें हैं। मंत्रियों को मिले विभागों पर नजर डालें तो स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग लेकर डॉ धन सिंह रावत को हल्का किया गया है और यह विभाग सुबोध उनियाल को सौंपे गए हैं। वहीं हलका झटका गणेश जोशी को भी महसूस हुआ है जिनसे ग्राम्य विकास छीनकर भरत सिंह चौधरी को सौंप दिया गया है। नए मंत्रियों में भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा को शहरी विकास जैसा अहम विभाग दिया गया है। जबकि  मदन कौशिक को पंचायती राज,आयुष शिक्षा और आपदा प्रबंधन विभाग दिए गए हैं। वहीं खजान दास को समाज कल्याण विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मिले हैं। रोडवेज विभाग प्रदीप बत्रा को सौंपा गया है।
विभागों के बंटवारे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा- 

“हमारी सरकार के बीते चार साल, सेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित रहे हैं, इसी क्रम में मंत्रिमंडल में नए शामिल सदस्यों सहित मंत्रिमंडल के सभी सहयोगियों के मध्य कार्य आवंटन भी कर दिया गया है। मंत्रिमंडल के सभी सदस्य अनुभवी हैं और जनसेवा से गहराई से जुड़े हैं। जनसेवा को सर्वोपरी रखते हुए, उत्तराखंड को विकसित भारत का अग्रणी एवं श्रेष्ठ राज्य बनाने में पूरी सरकार अपना योगदान प्राणोप्रण से देगी।हम सभी को उत्तराखंड की सवा करोड़ देवतुल्य जनता की सेवा करने का मौका मिला है, और यह सेवा भाव ही हमें अपनी देव तुल्य जनता के सपनों एवं आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए सदैव प्रेरित करता है।”

हाल ही में मुख्यमंत्री ने कैबिनेट का विस्तार करते हुए विधायक खजान दास, मदन कौशिक, भरत सिंह चौधरी, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। दरअसल, मंत्रिमंडल में पाँच पद लंबे समय से रिक्त चल रहे थे, जिनमें तीन पद पहले से खाली थे, एक पद पूर्व मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद रिक्त हुआ था, जबकि एक पद प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे के कारण खाली हुआ। इन परिस्थितियों में संबंधित विभागों का दायित्व भी मुख्यमंत्री के पास ही था।

ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री ने सिभागों के बंटवारे के ज़रिए राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि संतुलन साधने की कोशिश की है। पुराने मंत्रियों से कुछ विभाग लेकर और नए विभाग थमाकर प्रशासनिक दक्षता के मद्देनजर विभागों का पुनर्गठन किया गया है। इसी के तहत मुख्यमंत्री ने कुछ डिलीवरी वाले कुछ अहम विभाग अभी भी अपने पास रखे हैं ताकि चुनावी वर्ष में राजस्व अर्जित करने से लेकर जनता में मैसेजिंग के लिहाज से शासन की मुख्य कमान उनके अपने नियंत्रण में बनी रहे। वित्त, वाणिज्य, कर जैसे विभागों को मुख्यमंत्री ने इसी उद्देश्य के साथ अपने पास रखा है।

जबकि सतपाल महाराज को पीडब्ल्यूडी, पर्यटन, सिंचाई और लघु सिंचाई जैसे विभागों का जिम्मा सौंपे रखना उन पर मुख्यमंत्री के भरोसे को दर्शाता है। गणेश जोशी से ग्राम्य विकास विभाग लिया गया है लेकिन कृषि और सैनिक कल्याण जैसे विभाग उनके पास बने रहेंगे।
 इस पूरी मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद में असल झटका डॉ धन सिंह रावत को लगता हुआ दिखाई दे रहा है। चुनावी साल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धन दा से भारी भरकम और पब्लिक डिलीवरी वाला स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल शिक्षा वापस लेकर सुबोध उनियाल को दे दिया है। हालांकि सुबोध उनियाल हाल में संपन्न बजट सत्र के दौरान न केवल फ्लोर मैनेजमेंट में फेल नज़र आए बल्कि वे ख़ुद ही विपक्षी विधायकों के साथ उलझते नजर आए। लेकिन मुख्यमंत्री ने सुबोध पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखी है और उनको विधायी व संसदीय कार्य मंत्री बनाए रखा है। स्वाभाविक है कि चुनावी वर्ष में स्वास्थ्य जैसा विभाग थमाकर मुख्यमंत्री ने उनको बड़ा तोहफा दिया है। हालांकि इस विभाग में सबसे ज्यादा कामकाज करके दिखाने की भी जरूरत है। तकनीकी शिक्षा उनसे लेकर डॉ धन सिंह रावत को दी गई है और भाषा खजान दास को थमाया है। खजान दास को इसके अलावा समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और छात्र कल्याण विभाग दिए गए हैं। भरत सिंह चौधरी को ग्राम्य विकास, एमएसएमई और खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग दिए गए हैं।
मदन कौशिक को पंचायती राज, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, आयुष एवं आयुष शिक्षा, पुनर्गठन एवं जनगणना विभाग दिए गए हैं। प्रदीप बत्रा को परिवहन, आईटी एवं सुराज, विज्ञान प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग मिले हैं। राम सिंह कैड़ा को शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन, जलागम प्रबंधन विभाग मिले हैं।
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