सौग़ात: संविदा कर्मचारी होंगे नियमित, महीने की पांच तक पेंशन और टनकपुर से तख्त श्री नांदेड़ साहिब तक नई रेल सेवा

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Uttarakhand News: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने दस साल से राज्य में संविदा पर सेवाएं देने वालों को नियमित करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। धामी सरकार ने गन्ना किसानों से लेकर समाज कल्याण विभाग के पेंशनर्स और सिख श्रद्धालुओं को सौगात दी है।
जैसा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था उसी के अनुरूप अब सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है जिसके तहत दस साल की संविदा सेवा वालों को नियमित किया जाएगा। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक तथा तदर्थ रूप में नियुक्त कार्मिकों का विनियमितीकरण (संशोधन) नियमावली-2025 जारी कर दी है।

राज्य सरकार द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के क्रम में विनियमितीकरण नियमावली-2013 में संशोधन करते हुए दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक तथा तदर्थ रूप में नियुक्त कार्मिकों का विनियमितीकरण (संशोधन) नियमावली-2025 जारी कर दी गई है।सचिव कार्मिक शैलेश बगोली द्वारा इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी की गई। संशोधित नियमावली के अनुसार अन्य शर्तें पूर्ण करने पर दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक तथा तदर्थ रूप से नियुक्त वे कार्मिक विनियमितीकरण हेतु पात्र होंगे जिन्होंने दिनांक 04.12.2018 तक इस रूप में कम से कम 10 वर्ष की निरन्तर सेवा उस पद या समकक्ष पद पर पूर्ण कर ली हो।

जबकि उपरोक्त संशोधन से पूर्व यह व्यवस्था थी कि नियमावली में उल्लिखित अन्य शर्तें पूर्ण करने पर दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक तथा तदर्थ रूप से नियुक्त वे कार्मिक विनियमितीकरण हेतु पात्र थे, जिन्होंने वर्ष 2013 की नियमावली के प्रख्यापन की तिथि को इस रूप में कम से कम पाँच वर्ष की निरन्तर सेवा उस पद या समकक्ष पद पर पूर्ण कर ली हो।

सरकार के इस बड़े फैसले के बाद प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार का लक्ष्य हमेशा से कार्मिकों का हित सुरक्षित रखना रहा है। यह निर्णय उन सभी कार्मिकों को न्याय देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जिन्होंने वर्षों तक निरंतर सेवा देकर राज्य की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखा है।हमारी सरकार कर्मचारियों के हितों के प्रति संवेदनशील है और भविष्य में भी उनके कल्याण एवं सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाती रहेगी।

मुख्यमंत्री धामी के सख्त निर्देश— हर माह की 5 तारीख तक समाज कल्याण की सभी पेंशन अनिवार्य रूप से खातों में पहुँचेगी

सीएम ने किया ‘वन क्लिक’ से 13982.92 लाख की पेंशन किश्त का भुगतान—9.38 लाख लाभार्थी हुए लाभान्वित

राज्य सरकार के सभी आयोजनों में अब केवल उत्तराखंड के स्थानीय उत्पाद—बुके की जगह ‘बुक’ देने का आदेश

सभी सरकारी कार्यक्रम अधिक सादगीपूर्ण—समय और संसाधन बचत पर मुख्यमंत्री का विशेष जोर

समाज कल्याण विभाग की सभी पेंशन योजनाओं का इंटरनल ऑडिट—अयोग्य को लाभ न मिले, सीएम की कड़ी चेतावनी

समान प्रकृति की सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को इंटीग्रेटेड करने के निर्देश—डुप्लीकेसी पर पूर्ण रोक की तैयारी

डिजिटल इंडिया का श्रेष्ठ उदाहरण—डीबीटी से सीधे खातों में पेंशन, पारदर्शिता व सुशासन को मिली नई गति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में समाज कल्याण विभाग द्वारा “पेंशन किश्त का वितरण” कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने राज्यभर के पेंशन लाभार्थियों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत दी जाने वाली सभी पेंशन राशि प्रत्येक माह की 5 तारीख तक अनिवार्य रूप से लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुँचना सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी वृद्धजन, दिव्यांगजन, विधवा, किसान या कमजोर वर्ग को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम में वन क्लिक के माध्यम से नवंबर 2025 की 13982.92 लाख रुपये की पेंशन किस्त का भुगतान करते हुए 9,38,999 लाभार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया। उन्होंने विभाग को पेंशन योजनाओं की पूरी प्रणाली को और अधिक सरल, तेज़, समयबद्ध और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य की सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ समाज के सबसे कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों के लिए जीवनरेखा हैं; इसलिए इन योजनाओं की पारदर्शिता, सत्यापन और क्रियान्वयन सर्वोच्च प्राथमिकता पर होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पेंशन योजनाओं का आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) नियमित रूप से किया जाए, ताकि किसी भी अयोग्य व्यक्ति को लाभ न मिले। उन्होंने कहा कि सरकार की सहायता उसी तक पहुँचे जो वास्तव में उसका पात्र है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि समान प्रकृति वाली सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को इंटीग्रेशन के माध्यम से एकीकृत किया जाए, जिससे डुप्लीकेसी समाप्त हो और योजनाओं का लाभ तेज़ी से सही व्यक्ति तक पहुँचना सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी सरकारी समारोहों और कार्यक्रमों में स्थानीय उत्पादों को पूर्ण प्राथमिकता देने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के स्मृति-चिह्न, उपहार या सम्मान सामग्री में उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों का ही उपयोग किया जाए। उन्होंने बुके की जगह “बुक” देने की नई परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इसे समय, धन और संसाधन बचत वाला नवाचार बताया। मुख्यमंत्री ने सभी कार्यक्रमों को अधिक सादगीपूर्ण बनाने की बात कहते हुए कहा कि यह न सिर्फ एक अच्छी प्रशासनिक परंपरा है बल्कि सुशासन व उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम भी है।

समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, किसान पेंशन, परित्यक्ता पेंशन, भरण-पोषण अनुदान, तीर्थ पुरोहित पेंशन तथा बौना पेंशन—इन आठों योजनाओं के अंतर्गत 9.38 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रतिमाह पेंशन डीबीटी प्रणाली से सीधे खाते में भेजी जा रही है। डिजिटल लेन-देन की यह व्यवस्था न केवल पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे लाभार्थियों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिलती है।

विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं के लिए प्रतिवर्ष 13982.92 लाख रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है, जो सामाजिक सुरक्षा एवं जनकल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया की सोच के अनुरूप उत्तराखंड की पेंशन प्रणाली अब एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो रही है, जहाँ पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर सेवा—तीनों सुनिश्चित हो रहे हैं।

कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान पेंशन भुगतान व्यवस्था राज्य में सुशासन की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है और सरकार के निर्देशों के अनुरूप इसे और अधिक मजबूत और जन-केंद्रित बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि जनसेवा ही शासन का वास्तविक उद्देश्य है, तथा पेंशन योजनाओं को बेहतर बनाना सरकार की निरंतर प्राथमिकता रहेगी। कार्यक्रम में सचिव श्रीधर बाबू अदाकी, अपर सचिव बंशीधर तिवारी सहित समाज कल्याण विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वीकृति के क्रम में गन्ना की मूल्य वृद्धि का शासनादेश हुआ जारी

पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना की अगेती प्रजाति हेतु 405 रु प्रति कुंतल तथा सामान्य प्रजाति हेतु 395 रु प्रति कुंतल राज्य परामर्शित मूल्य निर्धारित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उत्तराखण्ड गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य बढाने की स्वीकृति के अनुपालन में शासन के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग अनुभाग के द्वारा शासनादेश निर्गत कर दिया गया है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के अनुसार पेराई सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश की समस्त चीनी मिलों द्वारा क्रय किये जाने वाले गन्ने की अगेती प्रजातियों हेतु 405 रु प्रति कुन्तल (मिल गेट पर) तथा सामान्य प्रजातियों हेतु  395 रु प्रति कुन्तल (मिल गेट पर) का राज्य परामर्शित मूल्य निर्धारित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि गत पेराई सत्र में राज्य में गन्ना की अगेती प्रजाति का राज्य परामर्शित मूल्य 375 रु प्रति कुंतल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य 365 रु प्रति कुंतल निर्धारित था। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के गन्ना किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेने के साथ ही पेराई सत्र 2025-26 हेतु गन्ना का मूल्य बढाए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी।

मुख्यमंत्री धामी ने किसान हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के अपनी प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा था कि गन्ना किसानों की आय बढ़ाना, उनकी उपज का उचित सम्मान सुनिश्चित करना तथा उन्हें सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान उपलब्ध कराना राज्य सरकार का दायित्व है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि क्रय केंद्रों पर किसी प्रकार की असुविधा न हो और भुगतान बिना देरी के सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना का बढ़ा हुआ मूल्य न केवल गन्ना किसानों को राहत देगा, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा तथा गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहन देने में सहायक सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग रणवीर सिंह चौहान ने गन्ना का राज्य परामर्शित मूल्य बढ़ाए जाने के संबंध में शासनादेश जारी करते हुए कहा है कि चीनी मिलों के बाह्य क्रय केन्द्रों से गन्ने का परिवहन मिल तक कराये जाने के मद में होने वाली कटौती 11 रु प्रति कुन्तल निर्धारित की जाएगी। पेराई सत्र 2025-26 हेतु उपरोक्तानुसार निर्धारित गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य राज्य की समस्त चीनी मिलों द्वारा देय होगा। पेराई सत्र 2025-26 हेतु निर्धारित उक्त दरों के अनुसार ही प्रदेश की चीनी मिलों द्वारा किसानों को भुगतान कराया जायेगा तथा भुगतान की सूचना मासिक रूप से शासन को उपलब्ध करायी जाएगी।

टनकपुर से तख्त श्री नांदेड़ साहिब तक नई रेल सेवा शुरू – उत्तराखंड के श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी मांग पूर्ण

देवभूमि उत्तराखंड और सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। टनकपुर (उत्तराखंड) से तख्त श्री नांदेड़ साहिब (महाराष्ट्र) तक नई रेल सेवा की शुरुआत को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस निर्णय से अब देश के प्रमुख पवित्र स्थलों में से एक नांदेड़ साहिब की यात्रा उत्तराखंड के हजारों श्रद्धालुओं के लिए और अधिक सुगम, सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो सकेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वूपर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल उत्तराखंड के सिख समुदाय और श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है, बल्कि प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर से चलने वाली इस रेल सेवा से तराई क्षेत्र सहित पूरे उत्तराखंड के श्रद्धालुओं को सीधा लाभ मिलेगा। यह रेल संपर्क सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हुए उत्तराखंड को राष्ट्रव्यापी धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त रूप से स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य के सर्वांगीण विकास हेतु सतत प्रयासरत है। नई रेल सुविधा उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करते हुए व्यापार, पर्यटन एवं सांस्कृतिक यात्राओं को भी प्रोत्साहित करेगी।

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