तरकश
धनदा की भागदौड़ और कुर्वे को हेल्थ

यों उत्तराखंड का स्वास्थ्य महकमा सकारात्मक और नकारात्मक वजहों से लगातार चर्चा में बना ही रहता है। फिर चौखुटिया का ऑपरेशन स्वास्थ्य आंदोलन रहा हो या पर्वतीय क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों पर रेफरल सेंटर होने का आरोप, हेल्थ महकमे को लगातार आईसीयू में ही विपक्षी बताते रहे हैं। वावजूद इसके हेल्थ मिनिस्टर के नाते डॉ धन सिंह रावत भागदौड़ और स्वास्थ्य सचिव के रूप में डॉ आर राजेश कुमार अपनी सहजता व सक्रियता के सहारे जैसे-तैसे स्थिति संभालते रहते थे। लेकिन शनिवार को करीब डेढ़ दर्जन आईएएस अफसरों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इधर-उधर किया तो सचिन कुर्वे की डॉ आर राजेश कुमार की जगह ताजपोशी कर दी गई। एक झटके में साढ़े तीन साल से भारी-भरकम हेल्थ संभाल रहे डॉ आर राजेश को प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम से लिए गए आवास आदि कुछ कम भार वाले विभाग थमा दिए गए हैं।
खबर यह उतनी बड़ी नहीं कि डॉ आर राजेश को हेल्थ में अच्छा काम करने का हल्के विभाग के रूप में यह कैसा इनाम मिला? बड़ी चर्चा इसी खबर की है कि आख़िर टूरिज्म को ‘नई ऊंचाइयों’ तक लेकर गए सचिन कुर्वे को हेल्थ जैसा बेहद महत्वपूर्ण और सीधे जनता से जुड़ा विभाग चुनावी साल में क्यों सौंपा गया होगा, बल? किसी ने कहा जैसा ‘अच्छा काम और तालमेल’ कुर्वे ने पर्यटन में मंत्री महाराज के साथ दिखाया था, क्या पता वैसी ही ‘उम्मीद’ हेल्थ में धनदा के साथ दिखाने की लगाई गई हों! अब यह सब तो निठल्ला चिंतन और क़यासबाजी है, असलियत तो आने वाले दिनों में दिखेगी। क्या पता दिल्ली में दो-दो सांसदों के साथ मंच पर त्रिमूर्ति योग बना रहे धनदा को इस बदलाव और आगामी तालमेल का ठीक-ठीक अंदाज़ा हो चुका हो!
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पुलिस महकमे में तबादला एक्सप्रेस कब?

बात आईएएस और पीसीएस अफसरों के ताजा तबादलों की हो रही है तो लगे हाथ चर्चा इस बात की भी कर लेते हैं जिसकी कानाफूसी सचिवालय से लेकर कई जगह हो रही। अजी चर्चा यही कि आख़िर उम्मीद जिलों में पुलिस अफसरों यानी आईपीएस अफसरों के तबादले की लगाई जा रही थी लेकिन खेल शासन स्तर पर हो गया। जिस तरह से ऊधमसिंह नगर में किसान सुखवंत सिंह ने सुसाइड किया और मरने से पहले एसएसपी से लेकर नीचे तक के पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया, उसके बाद माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने गृह जिले ने पुलिस के ऐसे हाल देख तबादला एक्सप्रेस पुलिस महकमे में पहले दौड़ाएंगे। आख़िर ऊधमसिंह नगर के सुखवंत सुसाइड प्रकरण से पहले हरिद्वार में कुख्यात गैंगस्टर त्यागी को जिस तरह से पुलिस अभिरक्षा में शूट किया गया था, उस घटना ने हरिद्वार पुलिस के चाल, चरित्र और चेहरे पर कई सारे सवाल खड़े कर दिए थे। खैर अब जब आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को इधर-उधर किया जा चुका है, तब माना जा रहा कि जल्द बारी पुलिस मुख्यालय से चिट्ठी आने की उम्मीद है।
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चौबेजी… बने दुबेजी! अरविंद पांडेयजी!

गदरपुर में क्या ग़ज़ब गदर मचा हुआ है बल्कि यह कहिए कि गदरपुर की पिच के बहाने भाजपा में क्या खूब कुरुक्षेत्र सजा हुआ है। लेकिन क्या इस खेल में पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा विधायक अरविंद पांडेय क्या पहले राउंड में पिछड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं? यों पांडेय दबंग विधायक माने जाते हैं और एक दौर में तराई में भाजपा की एकछत्र ताक़त भी हुआ करते थे लेकिन अब दौर बदल चुका है। ऊधमसिंह नगर से आने वाले पुष्कर सिंह धामी प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और अरविंद पांडेय भले धामी सरकार पार्ट वन में मंत्री रहे हों, धामी सरकार पार्ट टू में उनकी स्थिति बड़ी डांवाडोल हो रखी है। उनके विधानसभा क्षेत्र गदरपुर में मुख्यमंत्री के चाहने वालों की भरमार है और एक दो तो 2027 में टिकट के दावेदार भी बताए जा रहे। ज़ाहिर है भनक हमेशा चौकन्ना रहने वाले अरविंद पांडेय को बखूबी रही है। इसीलिए ज़वाबी हमले काफ़ी समय से कर रहे थे। इसी अंदाज़ में सुखवंत सुसाइड केस में सीबीआई जांच की मांग से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक से अपील कर बैठे। अब बदले में मुख्यमंत्री ने भी नज़रें टेढ़ी करनी शुरू की तो विधायक पर ज़मीन कब्जाने के आरोप नुमाया हो गए और फिर पता चला सीलिंग की ज़मीन पर कब्जा हुआ है। अब चर्चा यही है कि अबकी बार पांडेय जी दुबे बनते दिखाई दे रहे! फिर किसी ने कहा अभी राउंड वन ही है फाइनल मुकाबला तो 2027 में ही होगा।
कर्नल की देवदार ‘सिंहासन’ कुर्सी!

2022 में आम आदमी पार्टी की ग़लत गाड़ी में सवार होकर गंगोत्री में जमानत जब्त करा बैठे कर्नल अजय कोठियाल अबकी बार ‘राइट डायरेक्शन’ में दांव खेल रहे हैं, अब तक अधिकतर राजनीति के जानकार ऐसा ही मान रहे थे क्योंकि कर्नल भाजपा की गाड़ी में सवार हैं और भगवा पार्टी को पिछले दो विधानसभा चुनावों से जीत हासिल हो रही है और अब 2027 में हैट्रिक का नारा दिया जा रहा है। ऐसे में कर्नल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बुलावे पर AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और फिर उन्हीं की कृपा से दर्जा मंत्री पद भी पा गए। लेकिन इसके बाद से कर्नल कोठियाल की रणनीति अच्छे-अच्छों के समझ नहीं आ रही है। कर्नल ने उत्तरकाशी के धराली में आई आपदा में सैंकड़ों लाशों के मलबे में दबे होने का खुलासा कर मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करने का काम कर दिखाया था। जैसे-तैसे सरकार ने मामला संभाला। अब कर्नल कोठियाल ने एक और राजनीतिक पहलकदमी कर मुख्यमंत्री धामी से लेकर उत्तराखंड भाजपा के नेताओं को भौचक होने को मजबूर कर दिया है। कर्नल कोठियाल ने उत्तराखंड के देवदार की एक सिंहासननुमा कुर्सी बनवाई और उसे लेकर गोरखपुर पहुंच गए। अब कहा जा रहा है कि जब भी यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपुर आएंगे इसी पर विराजमान होकर लोगों के दुख-दर्द सुनेंगे। अब यों तो इसमें कोई बुराई नहीं क्योंकि अकेले कर्नल ही नहीं उत्तराखंड भाजपा के कई नेता भी दिल्ली वाया लखनऊ होकर जाते हैं।
सवाल यही उठ रहे कि जब कर्नल कभी डोईवाला तो कभी किस पहाड़ी सीट से 2027 का चुनावी दंगल लड़ने को आतुर हैं, तब योगी परिक्रमा से लाभ होगा कि देहरादून रहकर धामी परिक्रमा से बात बनेगी? ज़ाहिर है जवाब आसान नहीं है लेकिन कर्नल अजय कोठियाल ने देहरादून को इग्नोर कर गोरखपुर की राह पकड़ी है। मतलब साफ़ है उनके लिए धराली में मलबे में लाशें दबे होने के बयान के बाद लगता है अब देहरादून के कैंट रोड स्थित मुख्य सेवक सदन दूर और गोरखपुर पीठ पास हो चुका है। अब देखना यही है कि कर्नल को किस मोर्चे से लड़ने का मौका मिलता है!

