
देहरादून। ढाई दशक पहले अस्तित्व में आए उत्तराखंड राज्य के लिए विकास जितना ज़रूरी था उतना ही ज़रूरी था राजनीतिक स्थिरता का होना। राज्य बनने के बाद चंद महीनों की अंतरिम सरकार में ही दो-दो मुख्यमंत्री देख चुके उत्तराखंड को अभी राजनीतिक अस्थिरता के हिचकोले और खाने बाक़ी थे। केंद्र की राजनीति के अच्छे-ख़ासे अनुभव से लेकर अविभाजित उत्तर प्रदेश में सरकार के शिखर पर रह चुके पंडित नारायण दत्त तिवारी उत्तराखंड के पहले और अब तक के आख़िरी मुख्यमंत्री साबित हुए हैं जो पूरे पांच साल सरकार की कमान संभालने में सफल रहे। उसके बाद जैसा कि पहले ही कहा कि नवोदित राज्य को अस्थिरता का एक पूरा दौर देखना बाक़ी था।

खंडूरी-निशंक-खंडूरी होते हुए बहुगुणा-हरदा होते हुए उत्तराखंड में सत्ताधारी दल बदलते रहे और बदलते रहे पांच साल के एक ही टर्म में दो-दो, तीन-तीन मुख्यमंत्री! अगर कुछ नहीं बदला तो वह लंबे संघर्ष और शहादतों के बाद मिले युवा राज्य के हिस्से आया राजनीतिक अस्थिरता का दौर। मोदी-शाह दौर में भाजपा को 2017 में भारी बहुमत मिला तो उम्मीद बनी कि त्रिवेंद्र सिंह रावत एनडी तिवारी के बाद प्रदेश के दूसरे और भाजपा के पहले मुख्यमंत्री होंगे जो अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। लेकिन अस्थिरता का अंत इतना भी नजदीक नहीं था और 2022 के चुनावी समीकरण साधने उतरी भाजपा की उम्मीदें तीरथ सिंह रावत के ऊपर आकर टिक जाती हैं। फिर तीरथ अपने बयानों के बियाबान में उलझते हुए उपचुनाव के संवैधानिक अड़चन का शिकार होकर मुख्यमंत्री की गद्दी से उतार दिए गए। या कहिए कि उत्तराखंड की राजनीति में एक नए चेहरे के चमकने का दौर दस्तक दे रहा था।

चार जुलाई 2021 को, जब भाजपा प्रचंड बहुमत के वावजूद दो-दो मुख्यमंत्री कुर्सी से हटा चुकी थी, उसे किसी ऐसे चेहरे की तलाश थी जो राजनीतिक का आज़माया हुआ चेहरा ना होकर परिवर्तित होने वाली सियासी पटकथा का नायक साबित हो जिसमें जितने का माद्दा भी दिखे और बाहर-भीतर के राजनीतिक विरोधियों से पार पाने का हुनर भी हो। आज चार साल के बाद कोई धुर विरोधी भी मानेगा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के उसी दांव पर सौ फीसदी खरा उतरे हैं। उत्तराखंड भाजपा की ओर से सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके पुष्कर धामी अब उत्तराखंड राजनीति के दो दशक के सबसे मिथक को तोड़ने की तरफ बढ़ रहे हैं।

उत्तराखंड को राजनीतिक अस्थिरता के भंवर से बाहर निकालने के लिए यह मिथक टूटना भी चाहिए क्योंकि तिवारी के बाद अगर धामी पांच साल का कार्यकाल पूरा कर लेते हैं तो यह उत्तराखंड के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा। ऐसा होने के बाद ही उत्तराखंड के राजनेताओं के बीच घर कर चुकी इस सियासी व्याधि का भी उपचार संभव हो पाएगा जिसके तहत राजभवन में किसी भी नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के साथ साथ उन्हें पदच्युत करने का वायरस भी पॉवर कॉरिडोर्स में सांस लेने लगता है। यह राजनीतिक अस्थिरता का घुन सियासी दलों को परेशान करता ही है, प्रदेश के विकास की रफ़्तार के लिए भी अवरोधक साबित होता है। अगर धामी ऐसा कर गए तो यह भी उनकी ओर से युवा राज्य उत्तराखंड को एक बड़ी उपलब्धि होगी और जिस सधे अंदाज़ में धामी ने राजनीतिक पिच पर बेटिंग की है उसे देखकर ही संभवतया रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि धाकड़ धामी ने जिस तरह से अब तक धुआँधार पारी खेली है, वह उन्हें सियासत का ‘धुरंधर’ साबित करती है और उनके सामने सियासी सिक्सर का स्वर्णिम अवसर है।

चार साल बेमिसाल कार्यक्रम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को राज्य सरकार के चार वर्ष पूरा होने पर परेड ग्राउंड में आयोजित ‘4 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होने विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से चार वर्ष पूर्व प्रदेश की जनता ने सभी मिथकों को तोड़कर, उन्हें पुन: राज्य की सेवा का अवसर प्रदान किया था। इसके बाद इसी मैदान में शपथ ग्रहण के दौरान उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के अनुसार देवभूमि के गौरव को पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया था। अब चार साल के बाद वो गर्व से कह सकते हैं कि वो संकल्प तेजी से सिद्धि की ओर बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में बाबा केदारनाथ की दिव्य धरा से कहा था कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। इसलिए प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री के मुख से निकले इन शिवोमयी शब्दों को चरितार्थ करने के संकल्प को लेकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार ने बीते चार वर्षों में जहां सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत कर नागरिकों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने का प्रयास किया है। वहीं, विभिन्न नीतियों और योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के समग्र विकास का विजन प्रस्तुत किया है। इन्हीं प्रयासों से बीते चार वर्षों में राज्य ऐसी कई ऐतिहासिक उपलब्धियों का साक्षी बना है जो किसी भी छोटे राज्य के लिए असंभव समझी जाती थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार राज्य में जी-20 जैसे वैश्विक सम्मेलन की बैठकों का सफल आयोजन किया गया, वहीं राष्ट्रीय खेलों का भी भव्य आयोजन किया गया। इतना ही नहीं, पहली बार उत्तराखंड में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया गया, जिसमें 3.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को धरातल पर उतारा जा चुका है।
रखी सरकार की प्रगति रिपोर्ट
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बीते चार साल में राज्य की आर्थिकी में डेढ़ गुना से अधिक की वृद्धि हुई है और बीते एक वर्ष में राज्य की जीएसडीपी में 7.23 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई, साथ ही प्रतिव्यक्ति आय में भी 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दौरान राज्य में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं, वहीं स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर 1750 हो गई है। यही नहीं इस दौरान 2 लाख 65 हजार से अधिक माताएं-बहनें लखपति दीदी बनी हैं। राज्य सरकार के सतत प्रयासों से रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है।केंद्र ने भी सराहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2023-24 के सतत् विकास लक्ष्य इंडेक्स में उत्तराखंड को प्रथम स्थान प्राप्त होने से राज्य सरकार के प्रयासों पर मुहर लगी है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भी उत्तराखंड को एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी भी प्राप्त हुई है। नीति आयोग द्वारा जारी इंडिया इनोवेशन इंडेक्स रिपोर्ट में हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। बीते चार वर्षों से लगातार देश में “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” होने का गौरव प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखंड को नेशनल लॉजिस्टिक्स इंडेक्स, स्टेट स्टार्टअप इकोसिस्टम, स्टेट एनर्जी एंड ग्रीन इंडेक्स जैसे कई राष्ट्रीय सूचकांकों में भी विभिन्न पुरुस्कार प्राप्त हुए हैं। राज्य को खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी “राज्य खनन तत्परता सूचकांक’’ में देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है, साथ ही, इसके लिए राज्य को 200 करोड़ रुपए का पुरस्कार भी प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लिए गए सख्त और पारदर्शी निर्णयों का ही परिणाम है कि आबकारी और खनन जैसे विभागों से राज्य को पहले की तुलना में कई गुना अधिक राजस्व प्राप्त हो रहा है।
नई कार्य संस्कृति विकसित
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार देहरादून को एक आधुनिक और विकसित शहर बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज देहरादून में सरकार लगभग 1400 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय केवल घोषणाएं होती थी, तब केंद्र से भेजे गए 1 रुपए में से 15 पैसे ही लोगों तक पहुंच पाते थे। परंतु आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नई कार्य संस्कृति का सूत्रपात कर शासन व्यवस्था से दलालों और बिचौलियों का सफाया करने का काम किया। इसलिए आज प्रदेश सरकार जिस कार्य का शिलान्यास करती है उसे तय समय में पूर्ण कर उसका लोकार्पण भी करती है।
30 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पहले प्रदेश में नकल और पेपर लीक के कारण प्रतिभावान युवाओं के सपने चूर-चूर हो जाते थे। इसलिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार सख्त नकल विरोधी कानून लेकर आई। परिणामस्वरूप पिछले साढ़े 4 चार वर्षों में राज्य के 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है। आज 100 से अधिक नकल माफिया जेल की हवा खा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में केवल छोटी मछलियों पर ही कार्रवाई होती थी। लेकिन आज प्रदेश में बड़े आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा रहा है।देवभूमि के देवत्व बचाने का प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार देवभूमि के देवत्व की रक्षा के लिए डेमोग्राफी को भी संरक्षित रखने का प्रयास कर रही है। इसके लिए जहां एक ओर प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों को लागू किया, वहीं सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए 12 हजार एकड़ से अधिक की सरकारी भूमि को मुक्त कराया है। साथ ही छद्म भेष धारण कर लोगों को ठगने वालों के खिलाफ ऑपरेशन कालनेमि संचालित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता कानून लागू कर सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू किया है, जिसे देशभर के राष्ट्रवादी सोच के लोगों ने सराहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी वर्ष से जुलाई से उत्तराखंड में सभी मदरसों में सरकारी बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाएगा।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने कनक चौक से कार्यक्रम स्थल तक रोड शो में हिस्सा लिया। साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का भी अवलोकन किया। समारोह में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, खजान दास, राम सिंह कैडा, राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, मेयर सौरभ थपलियाल, विधायक सहदेव पुंडीर, उमेश शर्मा काऊ, विनोद चमोली, सविता कपूर, मुन्ना सिंह चौहान, बृजभूषण गैरोला, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव डॉ आरके सुधांशु, एल. फैनई, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव एसएन पांडेय और आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल उपस्थित रहे।