अड्डा ट्रेंडिंग।
पवन लालचंद। पूर्वोत्तर के छात्र एंजेल चकमा प्रकरण से एजुकेशन हब के रूप में देशभर में पहचान बना चुके देहरादून शहर की इमेज को झटका लगा था। अब राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के जूनियर छात्र की सीनियर छात्रों द्वारा बेल्ट और चप्पलों से पिटाई के मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पीड़ित जूनियर छात्र की शिकायत मिलते के बाद एंटी रैगिंग कमेटी को जांच के आदेश दे दिए। कमेटी द्वारा पीड़ित और आरोपी स्टूडेंट के बयान दर्ज करने के बाद दोनों आरोपी सीनियर छात्रों प्रज्ञांश पवार (एमबीबीएस बैच 2024) और मो. शाकिब (एमबीबीएस बैच 2023) को छात्रावास से निष्कासित कर दिया गया है।

राज्य के स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दून मेडिकल कॉलेज में घटित रैगिंग की घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने दून मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रकरण की गहन जांच हो ताकि दोषियों के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई की जा सके जो भविष्य के लिए नजीर बने।
क्या है पूरा मामला?
12 जनवरी को दून मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के 2025 बैच के के एक छात्र के साथ दो सीनियर छात्रों ने मारपीट की। पीड़ित छात्र की शिकायत के अनुसार एमबीबीएस बैच 2023 और बैच 2024 के दो छात्रों ने बेल्ट और चप्पलों से उसकी पिटाई की। यही नहीं, जूनियर छात्र पर बाल कटवाने का भी दबाव बनाया। शिकायत के बाद प्राचार्य डॉ गीता जैन ने प्रकरण की जांच डॉ गजाला रिजवी के नेतृत्व वाली एंटी रैगिंग कमेटी को सौंप दी। शनिवार को कमेटी ने आरोपी सीनियर छात्रों तथा पीड़ित जूनियर छात्र से पूछताछ की। कमेटी के सामने पीड़ित छात्र ने उसके साथ हुई प्रताड़ना की दास्तान बयान की। डरे-सहमे पीड़ित छात्र ने कहा कि उसके साथ ग़लत हुआ, जो कि नहीं होना चाहिए था।
दून के एजुकेशन हब ड्रीम पर बट्टा लग रहा ?
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इस तरह के घटनाक्रम देहरादून शहर की एजुकेशन हब के रूप में स्थापित छवि को खासा नुकसान पहुंचाते हैं। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में स्थापित शिक्षण संस्थानों में पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों के हज़ारों बच्चे पढ़ते हैं। साध ही अच्छी-खासी संख्या में विदेशी छात्र भी यहां आकर पढ़ाई करते हैं। ऐसे में छात्रों की सेफ्टी को लेकर बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। पहले छात्र एंजेल चकमा की मौत और अब राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का यह मामला बताता है कि शिक्षा के परिसरों और उनके आसपास के क्षेत्रों में छात्रों के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का माहौल किसी भी स्थिति में उत्पन्न ना होने पाए यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। सवाल है कि क्या संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन विषय की गंभीरता को समझ रहे।

