“हमारी सरकार के बीते चार साल, सेवा, सुशासन और जनकल्याण को समर्पित रहे हैं, इसी क्रम में मंत्रिमंडल में नए शामिल सदस्यों सहित मंत्रिमंडल के सभी सहयोगियों के मध्य कार्य आवंटन भी कर दिया गया है। मंत्रिमंडल के सभी सदस्य अनुभवी हैं और जनसेवा से गहराई से जुड़े हैं। जनसेवा को सर्वोपरी रखते हुए, उत्तराखंड को विकसित भारत का अग्रणी एवं श्रेष्ठ राज्य बनाने में पूरी सरकार अपना योगदान प्राणोप्रण से देगी।हम सभी को उत्तराखंड की सवा करोड़ देवतुल्य जनता की सेवा करने का मौका मिला है, और यह सेवा भाव ही हमें अपनी देव तुल्य जनता के सपनों एवं आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए सदैव प्रेरित करता है।”

हाल ही में मुख्यमंत्री ने कैबिनेट का विस्तार करते हुए विधायक खजान दास, मदन कौशिक, भरत सिंह चौधरी, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। दरअसल, मंत्रिमंडल में पाँच पद लंबे समय से रिक्त चल रहे थे, जिनमें तीन पद पहले से खाली थे, एक पद पूर्व मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद रिक्त हुआ था, जबकि एक पद प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे के कारण खाली हुआ। इन परिस्थितियों में संबंधित विभागों का दायित्व भी मुख्यमंत्री के पास ही था।
ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री ने सिभागों के बंटवारे के ज़रिए राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि संतुलन साधने की कोशिश की है। पुराने मंत्रियों से कुछ विभाग लेकर और नए विभाग थमाकर प्रशासनिक दक्षता के मद्देनजर विभागों का पुनर्गठन किया गया है। इसी के तहत मुख्यमंत्री ने कुछ डिलीवरी वाले कुछ अहम विभाग अभी भी अपने पास रखे हैं ताकि चुनावी वर्ष में राजस्व अर्जित करने से लेकर जनता में मैसेजिंग के लिहाज से शासन की मुख्य कमान उनके अपने नियंत्रण में बनी रहे। वित्त, वाणिज्य, कर जैसे विभागों को मुख्यमंत्री ने इसी उद्देश्य के साथ अपने पास रखा है।

