आर्य का भट्ट पर हमला: विकास हो रहा तो फिर प्रश्नकाल से परहेज क्यों ? विपक्ष की आवाज हंगामा कहकर दबा नहीं सकते

नेता प्रतिपक्ष ने पूछा: सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब क्यों नहीं देना चाहती? अगर विकास हुआ है तो तथ्यों से परहेज क्यों?

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Highlights
  • उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र से पहले सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस में जुबानी जंग छिड़ी।
  • नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने विपक्ष पर हंगामा करने का आरोप लगाने पर महेंद्र भट्ट पर किया पलटवार।
  • उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार होने के पूरे आसार।
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पर निशाना साधा है। यशपाल आर्य ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ताधारी दल के लिए सबसे आसान काम है विपक्ष पर आरोप लगाना, लेकिन सबसे कठिन काम है जनता के सवालों का सामना करना। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का वह बयान सुना है जिसमें वे आरोप लगा रहे थे कि कांग्रेस विधानसभा सत्र में सिर्फ हंगामा करती है। यशपाल आर्य ने कहा कि कहा कि जब सरकार प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने से बचती है, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जुड़े लगभग 40 महत्वपूर्ण विभागों के प्रश्नों के लिएसत्र के लिए सोमवार कभी नियत नहीं होता, तब यह स्वाभाविक है कि विपक्ष अपनी आवाज बुलंद करे। उन्होंने कहा कि महेंद्र भट्ट द्वारा इसे “हंगामा” कहना लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है।
नेता प्रतिपक्ष आर्य ने पूछा कि क्या विधानसभा सत्र केवल सरकारी उपलब्धियों के बखान और पूर्वलिखित भाषणों के पाठ के लिए बुलाया जाता है? क्या बेरोजगारी से जूझते युवा, पलायन से खाली होते गांव, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियाँ, बढ़ता भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के प्रश्न सदन में उठाए नहीं जाएंगे?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष का दायित्व है कि वह सरकार से सवाल पूछे, नीतियों पर चर्चा की मांग करे और जनभावनाओं को सदन तक पहुंचाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सभी विधायकों ने नियमों के तहत चर्चा की मांग रखी है और आगे भी रखते रहेंगे। आर्य ने कहा कि नियम 310 हो या अन्य संसदीय प्रावधान, हम हर लोकतांत्रिक माध्यम का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि सरकार जवाब क्यों नहीं देना चाहती? अगर सब कुछ ठीक है तो प्रश्नकाल से परहेज क्यों?
अगर विकास जमीन पर दिख रहा है तो तथ्यों से परहेज क्यों?यशपाल आर्य ने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है, एकतरफा घोषणाओं से नहीं। सदन सरकार का मंच नहीं, जनता की आवाज का मंच है। विपक्ष की आवाज को “हंगामा” कहकर दबाने की कोशिश वास्तव में उन लाखों नागरिकों की आवाज को दबाने का प्रयास है, जिनकी समस्याओं को हम उठा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वे स्पष्ट कर देना चाहते हैं-कांग्रेस न तो डरने वाली है और न ही झुकने वाली। जनता के अधिकारों, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए संघर्ष सदन के भीतर भी होगा और सड़क पर भी।

यशपाल आर्य ने कहा कि यदि सरकार सत्र को केवल ‘अपनी ढपली-अपना राग’ अलापने का औपचारिक कार्यक्रम बनाना चाहती है, तो यह याद रखे कि लोकतंत्र में विपक्ष की मजबूती ही संतुलन की गारंटी है और कांग्रेस यह संतुलन बनाए रखने के लिए हर संवैधानिक लड़ाई लड़ेगी।

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